Saturday, October 20, 2018

सर्दियों के मौसम में जरूर खाये ये फल जो हैं सेहत के लिए बहुत फायदेमंद


सर्दियों के मौसम के साथ फल आपके स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होते हैं। सर्दियों के मौसम के आगमन के साथ, फलों के विकल्प में या तो सेब या अन्य खट्टे फलो की किस्म होती है। यह फल, खाने पर लोगों को पोषण प्रदान करते हैं। मौसमी परिवर्तनों की वजह से आपके शरीर में सर्दी, खांसी और बुखार जैसी सामान्य समस्याएं पेश आ सकती हैं। सर्दियों में अगर ठिठुरती ठंड से बचना है तो अपने भोजन में फलों को जरूर शामिल करें। सर्दियों में फलों को खाने से हेल्थ के साथ-साथ शरीर में जरूरी पोषक तत्व भी बने रहते हैं। आइए जानते हैं कि सर्दियों में कौन-से फल हैं आपकी सेहत के लिए बेस्ट। 
सेब -

सेब किसी भी मौसम के लिए सबसे अच्छा फल माना जाता है। सर्दियों में रोजाना एक सेब का रस हेल्थ के लिए फायदेमंद होता है। इसको खाने से दिल और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। इसके साथ ही सेब भूलने की बीमारी को भी दूर करता है।



स्वीट पोटैटो -

अगर आपको आलू खाना पसंद नहीं तो स्वीट पोटैटो अर्थात शकरकंद खाएं। इसके सेवन से शरीर में विटामिन ए और सी के स्तर बढ़ता है। क्योंकि ये शरीर को गर्म रखते हैं, इसलिये सर्दियों में जड़ों वाली चीजें खाना बेहत फायदेमंद होता है। साथ ही शकरकंद डायट्री फाइबर और कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होती है।



अमरूद -

सर्दियों में अमरूद को फलों का राजा कहा जाता है। इसमें मौजूद पौष्टिक तत्व शरीर को फिट, स्वस्थ रखने के साथ-साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हाइपोग्लीसेमिक ब्लडप्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में फायदेमंद है। इसमें मौजूद पेक्टिन फाइबर पाचन बढ़ाने और भूख में सुधार करने में मदद करता है।



 अनार -

हर व्यक्ति को इस फल का सेवन करना चाहिए, क्योंकि इसके कई सारे स्वास्थ्य होते हैं। अनार के रस का सेवन करने से आपकी प्रतिरोधक क्षमता में काफी इज़ाफ़ा होता है और आप फ्री रेडिकल्स से भी दूर रहते हैं।



अंगूर

अंगूर विटामिन, मिनरल्स, काबरेहाइड्रेट, ग्लूकोज जैसे पौष्टिक तत्वों और पोली-फिनॉल, एंटीऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, फाइटोन्यूट्रिएंट्स गुणों से लबरेज है। इसमें मौजूद शर्करा रक्त में आसानी से अवशोषित हो जाती है और थकान दूर कर शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है। कोलेस्ट्रॉल कम करने में सक्षम अंगूर के सेवन से हृदय रोग का खतरा कम रहता है। यह रक्त विकारों को दूर कर क्लींजर का काम करते हैं।



संतरा

संतरा में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में होता है। इसके सेवन से सर्दी-जुखाम जैसी समस्याएं नहीं होती और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ जाती है। लोग तो यह भी कहते हैं कि यदि रोज संतरा खाया जाए तो आपको घर में एंटीबायॉटिक दवाएं रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी।


Thursday, October 11, 2018

यदि आपको भी करना है आपने दिमाग को बुलेट के जितना फास्ट तो इस उपाय से आप कर सकते है आपने दिमाग को तेज़


क्या आप जानते हैं लीची मीठा फल होने के साथ-साथ आपकी किस्मत भी चमकाता है। लीची बहुत ही मीठा और रसीला फल होता है। लीची शुक्र और बुध का होता है। 

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घर में लीची जरूर रखना चाहिए। इसको गर्मियों का रसगुल्ला कहा जाता है। बिहार, असम, बंगाल और आंध्र प्रदेश में लीची के बहुत से पेड़ पाये जाते है। 

जाने क्या-क्या हैं लीची के फायदे :-

यादाश्त को बढ़ाता है लीची -



जो बच्चे दिमाग के कमज़ोर होते है। पढ़ाई-लिखाई में जिनका दिमाग नहीं चलता है। मैथ,साइंस,कॉमर्स में कमज़ोर होते है उन्हें लीची खानी चाहिए।



जो बड़े, बूढ़े, बुज़ुर्ग होते है, जिनकी याददाश्त कम होने लगती है उनको भी लीची खानी चाहिए। 

गर्मी से बचाती है लीची -



गर्मी के दिनों में हाथ,पैरों और आँखों में बहुत जलन होती है। प्यास बहुत लगती है, पानी पीते-पीते पेट फूलने लगता है खाना खाने की इच्छा नहीं होती ऐसे में लीची का जूस पीने से गर्मी कम लगती है। 

लीची दिल की धड़कन को काबू करता है -



जिनकी दिल की धड़कन तेज़ होती है। बहुत से लोगो को ब्लड प्रेशर की बीमारी होती है। नसों में कोलेस्ट्रॉल जमा हो जाता है। रोज़ सुबह दो बिस्कुट खाकर लीची का जूस पीना चाहिए। 



जिनको शुगर है वह करेले का जूस और खीरा का जूस के साथ मिलाकर पीएं।

अब हम दो ही नहीं बल्कि पूरे पाँच-पाँच फ्लेवर में लेंगे लीची का मज़ा


मुजफ्फरपुर जिले की शाही व चाइना के साथ अब लोग तीन अन्य नई प्रजातियों की लीची का भी स्वाद ले सकेंगे। इतना ही नहीं दो माह ज्यादा तक इसका स्वाद मिल सकेगा। इसका लाभ देश के 20 राज्यों के किसान उठा रहे हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में सूबे के किसान सिर्फ शाही व चाइना लीची की पैदावार तक ही सीमित हैं।


नई प्रजाति की लीची का नाम गंडकी संपदा, गंडकी लालिमा व गंडकी योगिता है।

मई के अंत से शुरू हो जाता सीजन :-



शाही लीची का सीजन मई के अंत तक शुरू हो जाता है। जो करीब 15 दिनों तक रहता है। इसके बाद दस दिनों तक चाइना लीची। राज्य के किसान की बागवानी भी यही तक सीमित रहती है। जबकि वे नई प्रजाति गंडकी संपदा, गंडकी लालिमा व गंडकी योगिता की पैदावार भी कर सकते हैं। प्रत्येक प्रकार की लीची की अवधि दस दिनों की रहती है।

ऐसे करें बागवानी :-


इन नई प्रजातियों की लीची के लिए किसानों को तैयारी शाही लीची की तरह ही करनी चाहिए। जून से फरवरी तक कैलेंडर बनाकर बागवानी करनी पड़ेगी। नहीं तो कीड़े व मिठास में कमी आदि होने की समस्या भी आएगी। किसानों को जून में पेड़ों की छंटाई व जुलाई में खाद डालनी चाहिए। जुलाई में ही पेड़ से कल्ले फूटते हैं। अगर कमजोर कल्ले हैं तो किसानों को अधिक मेहनत करनी पड़ेगी।